समलैंगकता को अपराध माना जाए या नहीं इस पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को भी बहस हुई। केंद्र सरकार ने कहा कि वह इस मामले को अदालत के विवेक पर छोड़ती है। वहीं, मामले की सुनवाई कर रही संविधान पीठ के जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि दो समलैंगिक मरीन ड्राइव (मुंबई में) पर टहल रहे हों और पुलिस उन्हें परेशान करे और उन पर धारा 377 लगा दे।

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